सिविल अस्पताल में फिजिशियन की ओपीडी में सांस के मरीजों की संख्या में एकदम इजाफा हो गया है। फिजिशियन ने आमजन को सुबह और शाम की सेर करने से मना किया है।

किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली का धुआं शहर की फिजा में घुलने लगा है। स्वास्थ्य के लिए हवा जहरीली हो रही है। सांस के मरीजों के लिए यह हवा जानलेवा हो सकती है। सुबह और शाम को हवा में धुंआ महसूस होने लगा है। वहीं 14 अक्तूबर को जिले में 6 जगह पराली जलाने के मामले सामने आए वहीं जिले में अब तक पराली जलाने के 22 मामले सामने आए हैं।

सांस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इन रोगियों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। इन रोगियों के लिए सुबह और शाम की सैर खतरनाक है। धुआं फेफड़ों में जाकर ज्यादा नुकसान कर सकता है। उनका कहना है कि पराली का धुआं स्वस्थ रोगियों के लिए भी घातक है। आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर होने वाली है। पराली जलाने की शुरुआत में ही 30 से 40 मरीज दवा लेने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं। ऐसा करने से वे खुद और अपने परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते है।