सरकार अपनी आंखें बंद करके बैठी है

ऐसे विज्ञापनों से पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है.

रामदेव और बालकृष्ण को कारण बताओ नोटिस जारी

कोर्ट ने कहा कि सरकार अपनी आंखें बंद करके बैठी है. ऐसे विज्ञापनों से पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है. कोर्ट ने कंपनी को अवमानना का नोटिस जारी किया है.कोर्ट ने कंपनी को भी निर्देश दिया है कि वो भ्रामक जानकारी देने वाली अपनी दवाओं के सभी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दे.

जस्टिस अमानुल्लाह ने सुनवाई के दौरान कहा, “आज मैं वास्तव में सख्त आदेश पारित करने जा रहा हूं.”

कोर्ट की फटकार के बाद पतंजलि की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विपिन सांघी ने आश्वासन दिया कि कंपनी भविष्य में ऐसा कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेगी. साथ ही ये भी सुनिश्चित करेगी कि प्रेस में कैजुअल बयान न दिए जाएं.

1 मार्च 2012 से अपनी शुरुआत करने वाली पतंजलि भारतीय बाज़ार में अपनी एक मज़बूत पकड़ बना ली है. पतंजलि कई विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर भी दे रही है. खाद्य सामाग्री के साथ ही पतंजलि के सौन्दर्य उत्पाद और औषधियाँ भी बाजार में उपलब्ध हैं. पिछले साल दिसम्बर में पतंजलि ने एक विज्ञापन जारी किया था. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए आचार्य बालकृष्ण को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.सुप्रीम कोर्ट ने दवा के प्रभाव पर भ्रामक दावों के लिए पतंजलि को फटकार लगाई है, साथ ही बालकृष्ण यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. दरअसल पिछले साल पतंजलि ने एक विज्ञापन जारी किया था. जिसमें मधुमेह, बीपी, थायराइड, अस्थमा, ग्लूकोमा और गठिया आदि जैसी बीमारियों से “स्थायी राहत, इलाज और उन्मूलन” का दावा किया था. पतंजलि द्वारा जारी किए गए विज्ञापन के साथ ही रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी संज्ञान लिया था. इसी विज्ञापन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश देते हुए कहा है कि उस विज्ञापन के खिलाफ केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए है, केंद्र सरकार उसका स्पष्टीकरण दे.

रामदेव और बालकृष्ण को कारण बताओ नोटिस जारी

पतंजलि पर आरोप है कि ये विज्ञापन इन बीमारियों की दवा को नियंत्रित करने वाले नियमों का उल्लंघन करता है. दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में पतंजलि को ऐसे विज्ञापन जारी नहीं करने का निर्देश दिया था. लेकिन पतंजलि ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए इस विज्ञापन को जारी किया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कोर्ट की अवमानना ​​के लिए रामदेव और बालकृष्ण को कारण बताओ नोटिस जारी किया है

देश को धोखे में रखा गया-सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ऐसा न करने का हलफनामा देने के बावजूद दोनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में टिप्पणियां कीं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पूरे देश को धोखे में रखा गया है, स्थायी राहत शब्द अपने आप में भ्रामक है. सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को किसी भी दवा पर कोई भी विज्ञापन देने के लिए मना किया है. कोर्ट ने आदेश में ये भी कहा है कि पतंजलि, स्वामी रामदेव और बालकृष्ण किसी भी चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) पर कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे. जानकारी के लिए आपको बता दें, कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.