पालतू कुत्तों द्वारा हमलो की देश भर में बढ़ती घटनाओ के मद्देनजर और हमलों मे लोगों की मौत की बढ़ती गिनती के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को पिटबुल टेरियर, अमेरिकन बुलडाग, राटविलर और मास्टिफ्स सहित खूंखार कुत्तों की 23 नस्लों की बिक्री और उनके प्रजनन पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति ने ऐसी नस्ल के कुत्तों के आयात पर रोक लगाने की सिफारिश भी की है।

PETA (पीपल फार द एथिकल ट्रीटमेंट आफ एनिमल्स) इंडिया ने की थी अपील

पीपल फार द एथिकल ट्रीटमेंट आफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया की अपील और दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक रिट याचिका के बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है।पेटा इंडिया के शौर्य अग्रवाल ने कहा कि मनुष्यों की सुरक्षा के लिए केंद्र ने यह सराहनीय कदम उठाया है।

41 देश में प्रतिबंधित है पिटबुल

पिटबुल अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, डेनमार्क, स्पेन, कनाडा, इटली और फ्रांस समेत 41 देशों में प्रतिबंधित है। इसके अलावा भी कई देशों में इस नस्ल के कुत्ते को रिहायशी इलाकों में रखना वर्जित किया गया है। पिटबुल जब एक बार किसी को अपने शिकंजे में ले लेता है तो उसके जबड़े एक तरह से लाक हो जाते हैं और फिर उससे छुड़ाना बेहद मुश्किल होता है।अमेरिका में 2005 से 2019 के 15 वर्षों के दौरान कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों में पिटबुल का योगदान 66 प्रतिशत (346) रहा। संयुक्त रूप से पिटबुल और राटविलर का कुत्तों के काटने से हुई कुल मौतों में हिस्सा 76 प्रतिशत का रहा।

यह है 23 नस्ले जिन की बिक्री प्रजनन पर प्रतिबंध लगा

पिटबुल टेरियर्स, टोसा इनु, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टेरियर, फिला ब्रासीलेरियो, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडाग, बोअरबोएल, कांगल, टार्नजैक, बैंडोग, सरप्लानिनैक, जापानी टोसा, अकिता, मास्टिफ्स, राटविलर, रोडेशियन रिजबैक, कैनारियो, अकबाश और मास्को गार्डडाग, वोल्फ डाग, जर्मन शेफर्ड आदि।

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