ज्यादा पैसे कमाने के लालच में विदेशो में जाने वाले युवाओं की जिन्दा तस्वीर उनकी जुबानी !

विदेश की चाह रखने वाले अन्य युवाओं से सावधानी बरतने की अपील !

लोहे की रॉड, जलती हुई लकड़ी व सिगरेट दागी गई। उन्हें 15 दिनों में एक बार एक रोटी दी जाती थी। उन्हें पांच हजार रुपये में चार रोटियां दिखाकर एक रोटी देते थे।- पीड़ित युवा

बेलारूस में बच्चों को जेल में डाल दिया खाने को मांस दिया गया बच्चों ने सिर्फ चाय पीकर गुजारा किया- पीड़ितों के माता-पिता

भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान सहित कई अन्य देशों के हज़ारो युवा वहा फसे है , जो यातनाएं झेलने को मजबूर हैं। इसमें हरियाणवी की संख्या करीब 250 है।

आप लोगों ने डंकी Dunky फिल्म तो देखी ही होगी कुछ उसी तरह से ही वर्क परमिट पर जर्मनी भेजने के बहाने 2 युवकों को एजेंटों ने बेलारूस पहुंचा दिया। पर उन बच्चों को वहां शाहरुख खान की तरह कोई सहारा ना मिला.धोखाधड़ी कर जर्मनी के बहाने बेलारूस भेजे गए दो युवकों ने छह माह बाद घर लौटकर आपबीती बताई । बेलारूस से मौत के मुंह से बचकर अपने घर करनाल लौटे दो ममेरे भाइयों मुकेश और सन्नी ने बताया कि वह मंजर याद कर उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी चर्चा करते हुए भी डर लगता है। उन्हें नहीं पता था कि ढाई लाख रुपया प्रतिमाह की नौकरी के लालच में उन्हें इतनी बड़ी यातनाएं झेलनी पड़ेगी।

जिंदा रहने के दो विकल्प या सेना में भर्ती हो युद्ध में शहीद हो या 10 साल जेल!

मुकेश ने बताया बेलारूस पुलिस ने उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया। इसके बाद उन्हें बचने के लिए दो विकल्प बताए, रूसी सेना में भर्ती होकर यूक्रेन से युद्ध कर शहीद होना होगा या 10 साल तक जेल में रहने के बाद देश वापस लौटने की अनुमति मिलेगी।इनमें से परेशान कुछ युवकों ने सेना में जाने का रास्ता तो कुछ ने जेल का चुना। जिन युवाओं ने कोई भी विकल्प अपनाने से इनकार किया उन्हें जंगल में ले जाकर एजेंट के लोगों ने मार दिया। कुछ को जेल में डाल दिया।

करनाल व अन्य कई देशों के युवा वहां फंसे हुए थे !

दूसरे पीड़ित करनाल अपने घर पहुंचे सन्नी ने बताया हमारे साथ कई अन्य देशों के युवा व करनाल के युवा फंसे हुए थे। कई युवा तो मजबूरन सेना में भर्ती हो गए। जिनके परिवार वालों ने पैसे नहीं दिए उनके बच्चों को एजेंट के लोगों ने जंगल में मार दिया। इस बात का उन्हें तब पता चला जब दोबारा उन्हें जंगल में ले गए। जहां पर उन्होंने उन साथियों के शव देखे

घंटो बर्फ पर लेटाते सर पर बंदूक लगा हमारी वीडियो बना परिवार जनों से पैसे मांगते !

हम दोनों भाई साथ में रहे। हमें यातना सहनी पड़ी। वह हमें घंटों बर्फ पर लेटाते थे और सिर पर बंदूक रखकर डराने की धमकी देकर वीडियो हमारे परिवार को भेजते थे ताकि परिवार के लोग उन्हें पैसा दे सकें। उसने बताया कि हमें जंगल में ले जाकर हमारे परिवार को वीडियो के माध्यम से धमकाते थे। ।

पिछले 5 महीनो से रातों को सो नहीं पाए हम – पीड़ितों के माता-पिता

मुकेश के पिता श्याम लाल ने बताया कि रात के समय अगर कोई भी फोन पर मैसेज आता तो हम तुरंत उठकर देखते कि हमारे बच्चों का मैसेज है। यह प्रक्रिया लगभग पांच माह तक चली। हम पिछले 5 महीनो से रातो को सो नहीं पाए