बंदरों के हमले के दौरान 65 वर्षीय बुजुर्ग के पैर में फ्रैक्चर व पसलियां टूटी
20 दिन पहले बंदरों ने उनकी बहू को भी काट लिया था।
हिसार के सेक्टर 14 से आए दिन बंदरों के हमले की फोटो वीडियो सामने आ रही है. न जाने कितने ही लोग बंदरो द्वारा काटे व घायल किया जा चुके हैं. परंतु प्रशासन खानापूर्ति करते हुए एक-दो दिन के लिए पिंजरे लेकर कर्मचारियों अथवा ठेकेदार को भेजता है वह घंटो पिंजरे लगाकर बैठे रहते हैं पर उनसे बंदर नहीं पकड़े जाते या तो बंदर ज्यादा समझदार हो गए हैं या फिर इन्हें पकड़ने का तरीका गलत है. ऐसा ही एक हादसा कल 65 वर्षीय बुजुर्ग सेक्टर 14 निवासी जगदीश धमीजा के साथ हुआ बंदरों ने 65 वर्षीय बुजुर्ग पर हमला कर दिया, जिससे वह नीचे गिर गए। इस दौरान उनके एक पैर में फ्रैक्चर आ गया और पसलियां टूट गईं।

सेक्टर-14 निवासी जगदीश धमीजा ने बताया कि सुबह घर की दीवार पर कुछ बंदर बैठे थे। इसी बीच घर से कूड़ा एकत्रित करने वाली गाड़ी आई तो वह बंदरों को भगाने का प्रयास करने लगा। इस दौरान एक बंदर ने उन्हें दो जगह काट लिया। बंदर से बचने के प्रयास में वह गिर गए। इससे उसकी पसलियां और एक पैर की अंगुलियों में फ्रैक्चर आ गया। जगदीश धमीजा ने बताया कि बुधवार सुबह पोती को लेने के लिए स्कूल बस आई तो उस दौरान बाहर बंदर बैठे थे। मैंने बस ड्राइवर से कहा कि वह घर के अंदर आकर पोती को ले जाए। जगदीश धमीजा के मुताबिक दो दिन पहले पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति को बंदर ने काट लिया था। घायल ने बताया कि 20 दिन पहले बंदरों ने उनकी बहू को भी काट लिया था। वहीं वार्ड-2 की पूर्व पार्षद कविता केडिया ने नगर निगम प्रशासन से बंदरों को पकड़ने की मांग की है।

बंदरों को शहर में लाकर छोड़ा तो नहीं जा रहा ?
स्थानीय लोगों द्वारा यहां तक आरोप लगाए जा रहे हैं कि पिछले कई सालों से बार-बार बंदर पकड़ने के बावजूद भी बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है.इस तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है कि यह बंदर कहां से आ रहे हैं कहीं इन्हें कोई शहर में लाकर छोड़ तो नहीं रहा?
अर्बन स्टेट 2 मे भी बंदरो के हमलो की कई शिकायते
अर्बन एस्टेट टू आरडब्ल्यूए के महासचिव राकेश आर्य ने बताया कि तीन बार बंदर पकड़ने वाला ठेकेदार आया। उसने पिंजरा भी लगाया, लेकिन एक भी बंदर पिंजरे में नहीं फंसा। राकेश आर्य ने बताया कि क्षेत्र में 10 से 12 बंदरों का झुंड घूमता रहता है। यह बंदर घरों में घुस जाते हैं। कपड़े फाड़ डालते हैं व गमले तोड़ देते हैं। अगर खाने-पीने का सामान मिलता है तो उसे उठा ले जाते हैं। इसके अलावा ये बंदर पार्कों में आ जाते हैं और पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन बंदरों के कारण हर समय एरिया में डर का माहौल बना रहता है। प्रशासन इन हादसों को गंभीरता से नहीं ले रहा!


