महेंद्रगढ़ के कनीना में स्कूल बस हादसे के बाद से पुलिस प्रशासन हरकत में है.इस हादसे में 6 विद्यार्थियों की मौत हो गई थी और काफी बच्चे घायल हो गए थे. शुक्रवार को प्रदेश के मुख्य सचिव ने वी सी के माध्यम से बैठक आयोजित की. बैठक में सीबीएसई हरियाणा शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों से जुड़ी एसोसिएशन तथा हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रतिनिधियों को कहा कि स्कूल संचालकों का यह पूर्ण दायित्व बनता है कि उनके स्कूलों में विद्यार्थियों को लाने व ले जाने वाले वाहन सुरक्षित हो उन्होंने अभिभावकों से भी यह अपील करते हुए कहा कि ऑटो जैसे असुरक्षित वाहनों में अपने बच्चों को स्कूल ना भेजें

हिसार पुलिस ने आज स्कूल बसों की चैकिंग की। बस ड्राइवरों को ट्रैफिक नियमों संबंधी जानकारी दी और बस हेल्पर को बच्चों को सही तरीके से बिठाने और उतारने के बारे में जानकारी दी। चेकिंग के दौरान बसों में जो कमी पाई गई उस संबंधी ड्राइवरों को बताया गया। जिन बसों में कमियां थी, उन्हे इंपाउंड किया गया और चालान भी काटे गए।

पुलिस अधीक्षक श्री मोहित हांडा, आईपीएस ने बताया कि बच्चो की सुरक्षा के मध्यनजर जो स्कूल या बस चालक सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत निर्धारित नियमों का पालन नहीं करेगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आज चैकिंग के दौरान 7 स्कूल बसों को इंपाउंड और 16 बसों के चालान किए गए है।
पुलिस अधीक्षक महोदय ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अच्छे प्रबंध कर उन्हे सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाना है। उन्होंने सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए है कि सभी अपने स्कूल बस के ड्राइवर और सहायक की पुलिस वेरिफिकेशन करवाए व साथ ही उनके बैक ग्राउंड की भी जानकारी ले और ये भी सुनिश्चित करे की उनमें किसी भी प्रकार के नशे की लत न हो।

स्कूल बसों में एक सीसीटीवी कैमरा आगे एक पीछे चालू हालत होना चाहिए, जिनमें डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग की क्षमता हो। इन सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्डिंग बैकअप की क्षमता होनी चाहिए।
सभी बसों में आग लगने पर बचाव के साधन भी उपलब्ध होने चाहिए।
सभी स्कूल संचालक अपने बस ड्राइवर की समय समय पर चिकित्सा जांच करवाएंगे।
सभी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिएं। सभी स्कूल वाहनो पर स्पीड गवर्नर सिस्टम कंपनी द्वारा लगा हुआ होने चाहिए।

बस में सभी आवश्यक परमिट, इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, पॉल्यूशन प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज बस में या ड्राइवर के DG लॉकर ऐप में होने चाहिए।
स्कूली बसों में महिला अटेंडेंट का होना अनिवार्य है।
बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल बसों में जीपीएस सिस्टम लगा हो।
बस ड्राइवर के पास बस चलाने का कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए। और यह भी सुनिश्चित करे कि उस पर एक्सीडेंट या किसी अन्य प्रकार का कोई अभियोग अंकित न हो।
बस संचालक के पास स्कूल वाहन का परमिट या स्वीकृति पत्र होना अनिवार्य है। शहर में बसों की स्पीड मानक से अधिक न हो।

बसों में बच्चों की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया स्टॉफ, कंडक्टर महिला अटेंडेंट पूरी तरह से ट्रेंड होने चाहिए।
बसों में नियुक्त किया गया स्टॉफ अपनी यूनिफार्म में होना चाहिए तथा उसके पास सिविल सर्जन से मेडिकल फिटनेस का प्रमाण-पत्र होना चाहिए।
स्कूल बसें पीले रंग की होनी चाहिए और वाहनों के आगे सफेद रिफ्लेक्टर पट्टी, पीछे लाल रिफ्लेक्टर पट्टी व साइड में पीले रंग की रिफ्लेक्टर पट्टी लगी हुई होनी चाहिए। व स्कूल वाहनों की खिड़कियों पर ग्रिल लगी होनी चाहिए। साथ ही एक आपकालीन दरवाजा या खिड़की होनी चाहिएं।
स्कूल बसों पर आगे तथा पीछे स्कूल बस’ अवश्य लिखा होना चाहिए और यदि किराए पर बस हैै ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए।
स्कूल बसों पर पुलिस के नंबर के साथ नियंत्रण कक्ष और स्कूल संचालक का नंबर व बस ड्राइवर का नाम व नंबर साफ साफ लिखा होना जरूरी है।

स्कूल बस ड्राइवर यातायात के नियमों की पालना करे। गलत दिशा में वाहन ना चलाए। सीट बेल्ट का उपयोग करे।
पुलिस अधीक्षक महोदय ने स्कूल संचालकों को कहा है कि वे स्कूली वाहनों में निर्धारित मानकों को जल्द से जल्द पूरा करे। पुलिस द्वारा अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की जांच की जाएगी। जिन स्कूली वाहनों में मानकों की अनदेखी या खामियां पाई जायेगी उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

