इस नियम के लागू होने से हमें मैसेज की पूरी चेन रखनी होगी और हमें नहीं पता कि किस मैसेज को डिक्रिप्ट करने के लिए कहा जाएगा.सरकार के इस नियम के तहत हमें लाखों-करोड़ों मैसेजों को कई सालों तक स्टोर करके रखना पड़ेगा – व्हाट्सएप

व्हाट्सऐप और फेसबुक कमर्शियल पर्पज के लिए यूजर्स की जानकारी को मोनिटाइज करते हैं. यह कानूनी रूप से यह नहीं कह सकते कि वे गोपनीयता की रक्षा करते हैं.- केंद्र सरकार

व्हाट्सएप भारत में 2010 में आया था आज इसके 50 करोड़ से ज्यादा यूजर रोजाना 100 करोड़ से अधिक मैसेज भेजते हैं दुनिया के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप जिसके दुनिया भर में 224 करोड़ मंथली यूजर्स हैं ने दिल्ली हाई कोर्ट से मैसेज एनक्रिप्शन हटाने से मना कर दिया है.

इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप ने कोर्ट को बताया कि अगर उसे अपने ऐप से मैसेज एनक्रिप्शन को तोड़ने या उसे हटाने के लिए मजबूर किया गया तो वो भारत में अपनी सर्विस बंद कर देगा.मेटा के स्वामित्व वाली कंपनी व्हाट्सऐप ने कहा कि उनका एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन फीचर्स हरेक यूज़र्स के प्राइवेसी की सुरक्षा करता है. इस फीचर की वजह से व्हाट्सऐप के द्वारा भेजे गए या रिसीव किए गए मैसेज को सिर्फ भेजने वाला या रिसीव करने वाला यूज़र ही पढ़ सकता है.

व्हाट्सऐप ने केंद्र सरकार के नए आईटी रूल्स 2021 को कोर्ट में चैलेंज किया है. व्हाट्सऐप ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाट्सऐप का पक्ष रखने वाले वकील तेजस करिया ने कोर्ट को बताया कि, व्हाट्सऐप को अगर एनक्रिप्शन तोड़ने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो वो भारत में अपना सर्विस बंद कर देंगे.तेजस ने कहा कि लोग व्हाट्सऐप का इस्तेमाल इसके प्राइवेसी फीचर्स की वजह से ही करते हैं, जो कंपनी ने  एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के जरिए उपलब्ध कराया है.व्हाट्सऐप की ओर से तेजस करिया ने कोर्ट को बताया कि सरकार का नया नियम यूज़र्स की प्राइवेसी को खतरे में डाल सकता है और सरकार ने इस नियम को लेकर प्लेटफॉर्म से सलाह भी नहीं ली है.

इस नियम के लागू होने से हमें मैसेज की पूरी चेन रखनी होगी और हमें नहीं पता कि किस मैसेज को डिक्रिप्ट करने के लिए कहा जाएगा.सरकार के इस नियम के तहत हमें लाखों-करोड़ों मैसेजों को कई सालों तक स्टोर करके रखना पड़ेगा. इस पर बेंच ने पूछा कि क्या ऐसा कानून दुनिया में कहीं और मौजूद है. “क्या ये मामला दुनिया में कहीं भी उठाया गया है. क्या आपसे  दक्षिण अमेरिका समेत दुनिया में कहीं भी जानकारी शेयर करने के लिए नहीं कहा गया.” इस पर वकील करिया ने कहा कि नहीं, ब्राजील में भी इस तरह का कोई नियम नहीं है. केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि व्हाट्सऐप और फेसबुक कमर्शियल पर्पज के लिए यूजर्स की जानकारी को मोनिटाइज करते हैं. यह कानूनी रूप से यह नहीं कह सकते कि वे गोपनीयता की रक्षा करते हैं. केंद्र ने यह भी कहा कि विभिन्न देशों के रेगुलेटर्स का मानना ​​है कि इसके लिए फेसबुक की जवाबदेही तय होनी चाहिए. 

दोनों पक्षों को सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने व्हाट्सऐप और मेटा की इस याचिका की सुनवाई को आगे बढ़ाने की तारीख 14 अगस्त को तय की है. दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने इस मामले पर कहा कि प्राइवेसी के अधिकार पूरे नहीं है और इसको लेकर कहीं न कहीं बैलेंस बनाना पड़ेगा.