भाजपा : रणजीत सिंह के हार के कारण
ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के प्रति गहरा आक्रोश होना।
भाजपा संगठन की भीतरीघात, पैसे के गबन तक के अफवाहें।
रणजीत सिंह का पूरा भाषण केवल नरेंद्र मोदी पर केंद्रित रहना।
अनुसूचित वर्ग का वोट भाजपा की बजाए कांग्रेस की ओर स्थानांतरित होना।
विरोध होने के बाद भी पूर्व सीएम मनोहरलाल का हिसार में प्रचार करना, जिससे नकारात्मक असर गया

हिसार लोकसभा क्षेत्र की आदमपुर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी रणजीत सिंह चौटाला को करारी हार मिली है पूर्व सीएम मनोहरलाल ने लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान नलवा विधानसभा क्षेत्र के गांव कैमरी में रैली की थी। रैली में उन्होंने पूर्व सीएम चौधरी भजनलाल का नाम लिए बिना भ्रष्टाचार को लेकर टिप्पणी की थी।

कांग्रेस : जे पी की जीत के कारण

किसान आंदोलन में किसानों के पक्ष में खड़ा होना।
खुद को जमीनी स्तर का कार्यकर्ता की तरह से दिखाते हुए जुड़ाव बनाना।
लोकसभा क्षेत्र के लोगों की समस्याओं, शिकायतों की जानकारी, नब्ज पकड़ने में माहिर।
उकलाना, नारनौंद, उचाना विधानसभा में कांग्रेस के लिए एकतरफा माहौल बनना।
हिसार की सीट पर जीत का अनुभव।

कांग्रेस प्रत्याशी जेपी ने पकड़ी आदमपुर की नब्ज उन्होंने बिश्नोई समाज के बड़े चेहरे रहे चौ. पोकरमल के बेटे प्रदीप बैनीवाल को अपना सारथी बनाते हुए उन्हें चुनाव जीताने की बड़ी जिम्मेवारी दी। प्रदीप बैनीवाल आदमपुर शहर व बिश्नोई बहुल गांवों में जयप्रकाश के लिए पसीना बहाया। 

जजपा पांचवें स्थान पर खिसक गई।

जजपा के विधायक अपने बूथ पर भी पार्टी प्रत्याशी को वोट दिलाने में नाकाम रहे। उकलाना से विधायक अनूप धानक के बूथ पर जजपा को केवल एक वोट मिला। जजपा विधायक जोगीराम सिहाग के बूथ पर केवल 5 वोट जबकि नारनौंद विधायक रामकुमार गौतम के बूथ पर 5 वोट ही मिले

देवरानी-जेठानी मतगणना केंद्र पर भी नहीं पहुंचीं
जजपा प्रत्याशी नैना चौटाला व इनेलो प्रत्याशी सुनैना चौटाला को अपने वोट के बारे में पहले से ही अनुमान था। इसके चलते देवरानी-जेठानी मतगणना केंद्र पहुंची ही नहीं। इन पार्टी के जिला अध्यक्ष तक नहीं आए। वर्ष 2014 के चुनाव में इनेलो प्रत्याशी के तौर पर दुष्यंत चौटाला सांसद बने थे। 2019 के चुनाव में जजपा प्रत्याशी के तौर पर दूसरे स्थान पर रहे। इस बार जजपा को पांचवें स्थान पर खिसक गई।