4 जून को जारी नीट यूजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा परिणाम में 67 विद्यार्थियों ने टॉप कर ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त किया जबकि 2023 मैं 2 टॉपर रहे थे 2022 में 3 टॉपर, 2021 मैं 1 और 2020 में भी 1 स्टूडेंट नहीं टॉप किया था |

4700 सेंटर में से 6 सेंटर पर परीक्षा आयोजन में दिक्कत आई थी |

करीब 24 लाख बच्चों ने परीक्षा दी, जिनमें से सिर्फ 1563 को ग्रेस मार्क्स मिले |

नीट यूजी परिणाम को लेकर खड़ा हुआ बवाल अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस परीक्षो का आयोजित करने वाली संस्था एनटीए सवालों के घेरे में है मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2024 का रिजल्ट 4 जून को जारी किया गया था। रिजल्ट में 67 कैंडिडेट्स ने टॉप किया था। अधिकतर स्टूडेंट्स को 100 प्रतिशत मार्क्स मिले जिसको लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.परीक्षा की न्यायिक जांच की मांग के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है इस परीक्षा के खिलाफ दो याचिका हाई कोर्ट में और एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई इन याचिकाओं में पेपर को दोबारा कराने की बात कही गई है। नीट यूजी एग्जाम के रिजल्ट पर सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि इस परीक्षा में बैठने वाले ज्यादा कैंडिडेट्स को 720 में से 720 मार्क्स मिले हैं। इसके अलावा ऐसे भी स्टूडेंट्स की संख्या बहुत अधिक है जिन्हें 718 और 719 नंबर्स मिले हैं। इस परीक्षा के बारे में अच्छी समझ रखने वाले एक्सपर्ट का यही मानना है कि इस एग्जाम में इतने स्टूडेंट्स का ऐसे नंबर्स लाना असंभव था।

सुप्रीम कोर्ट ने रिजल्ट जारी करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बता दें कि नीट परीक्षा पर सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि इस साल 67 स्टूडेंट्स ने इस परीक्षा को टॉप किया। इन सभी कैंडिडेट्स ने ऑल इंडिया नंबर 1 रैंक हासिल की है जबकि पिछले साल सिर्फ 2 टॉपर रहे थे। वहीं 2022 में 3 और 2021-2020 में 1-1 स्टूडेंट ने ही इस परीक्षा को टॉप किया था। बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस ने 6 जून को यह बताया था कि जिन 67 स्टूडेंट्स ने नीट यूजी में टॉप किया है उनमें से 44 को बेसिक फिजिक्स में एक गलत सवाल के जवाब में ग्रेस मार्क्स देकर आगे बढ़ाया गया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि NCERT की कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक के पुराने संस्करण में एक गलती थी।

करीब 24 लाख बच्चों ने परीक्षा दी, जिनमें से सिर्फ 1563 को ग्रेस मार्क्स मिले हैं।

एनटीए के डीजी सुबोध कुमार सिंह ने एनटीए को एक पारदर्शी संस्था बताते हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमने 4700 सेंटर पर परीक्षा आयोजित किया था. जिसका रिजल्ट 4 जून को घोषित किया गया था.सिर्फ 1600 कैंडिडेट्स ऐसे थे, जिनको गलत पेपर मिला. उनको पूरा समय नहीं मिला. ऐसे कई स्टूडेंट्स अदालत गए. उन्होंने कोर्ट में बोला कि उनका जो टाइम खराब हुआ है उसका कंपन्सेशन दिया जाए एनटीए के डीजी ने कहा कि एक कमेटी गठित की गई और पाया गया कि जिन स्टूडेंट्स का टाइम लॉस हुआ था, उनके नंबर बढ़ाए गए.

उन्होंने 719 और 718 अंक मिलने पर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया. सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि हमने सब की जांच के बाद ही रिजल्ट जारी किया है. पूरे देश में ऐसा नहीं हुआ है. मामला सिर्फ 6 सेंटर और 1600 बच्चों का है. प्रेस वार्ता के दौरान हायर एजुकेशन सेक्रेटरी ने कहा कि सिर्फ सवाई माधोपुर में पेपर लेकर छात्रों के केंद्र से बाहर आने का मामला आया था। उसी समय वहां परीक्षा रोक दी गई और दोबारा नए NEET Question Paper के साथ एग्जाम लिया गया था। सिर्फ 6 केंद्रों पर दिक्कतें आई । अन्य सभी जगह बिना किसी गड़बड़ी के नीट परीक्षा पूरी हुई थी। उन्होंने बताया कि एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है. जो शिकायत वाले सेंटरों पर विजिट करेगी. कमेटी के सुझाव के आधार पर देखा जाएगा कि क्या कोई दूसरा फॉर्मूला अपनाकर समाधान किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर देखा जाएगा कि रिजल्ट दोबारा जारी किया जाए या नहीं.

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