जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए हरियाणा जींद के पैरा कमांडो प्रदीप नैन पिता बलवान सिंह के इकलौते बेटे थे। कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ में बलिदान हुए प्रदीप नौ वर्ष पहले सेना में भर्ती हुए थे। उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें पैरा कमांडो बनाया गया था। बलिदानी प्रदीप नैन परिवार में अपने पीछे पिता बलवान सिंह, माता रामस्नेही और पत्नी मनीषा को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी गर्भवती हैं।शहीद की मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रदीप की मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनके मुंह से सिर्फ बेटे के बारे में ही शब्द निकल रहे हैं। मां कह रही कि बेटा तू हमें क्यों छोड़कर चला गया, तेरे बिना हम कैसे जिएंगे। परिजनों का कहना है कि प्रदीप बेहद सीधा-सादा और हंसमुख लड़का था।


प्रदीप की घर में सभी से 15 दिन पहले फोन पर बात हुई थी। वह खुशी-खुशी बात कर रहा था। उसने प्रमोशन के साथ जुलाई में ही घर आने को कहा था, लेकिन यह सब सपना ही रह गया। अब तिरंगे में लिपटा हुआ आया। इतना कहते हुए प्रदीप के पिता बलवान सिंह का गला रुंध गया। अपने आपको संभालते हुए उन्होंने कहा कि उनका सभी कुछ खत्म हो गया। उनका इकलौता बेटा हमेशा के लिए दूर चला गया। वह दो महीने पहले छुट्टी काटकर घर से जल्दी ही वापस आने के लिए ड्यूटी पर गया था।

दक्षिण जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले के मुदरघम इलाके में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में जींद के जाजनवाला गांव निवासी 28 वर्षीय प्रदीप नैन बलिदान हो गए। सोमवार सुबह उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पार्थिव शरीर जैसे ही गांव में पहुंचा तो पूरा गांव सिसक उठा। उनकी अंतिम विदाई में हजारों लोग पहुंचे। सभी भारत माता की जय, प्रदीप नैन अमर रहे के गगनभेदी नारे लगा रहे थे। सेना की गाड़ी में उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर लाया गया। गांव के श्मशान घाट में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस और सेना की टुकड़ी ने राजकीय सम्मान के साथ फायरिंग कर उन्हें अंतिम विदाई दी।



