✍️हरियाणा में नही चल रहा है मोदी और शाह का जादू
✍️हरियाणा में अधिक कारगर नहीं रही हैं मोदी और शाह की रैलियों

हिसार टाइम्स – लोकसभा- 2024 के चुनावों हो या विधानसभा-2019 की बात हो हरियाणा में पीएम मोदी और अमित शाह का भी जादू नहीं चला है। जहां-जहां मोदी और अमित शाह ने रैली की वही-वहीं बीजेपी हारी है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में तीन रैलियां करके 5 लोकसभा सीटों पर असर डालने की कोशिश की। मई 18 को उन्होंने अंबाला में बीजेपी उम्मीदवार बंतो कटारिया के लिए प्रचार किया। बीजेपी ये सीट हार गई। बंतो कटारिया दिवंगत रतनलाल कटारिया की पत्नी हैं. रतनलाल कटारिया 2014 और 2019 में यहां से सांसद बने थे। उसी दिन पीएम मोदी ने सोनीपत लोकसभा क्षेत्र के गोहाना में रैली की थी। इस रैली के जरिए मोदी ने सोनीपत के साथ ही रोहतक सीट को साधने की कोशिश की थी. लेकिन यहां भी मोदी का मैजिक नहीं चला और बीजेपी को इन दोनों सीटों पर हार ही नसीब हुई। सोनीपत और रोहतक दोनों सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी।
✍️अमित शाह ने 3 सीटों पर रैली की, 2 पर मिली हार

लोकसभा चुनाव-2024 के दौरान ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिसार और रोहतक लोकसभा क्षेत्रों में प्रचार किया था, इन दोनों सीटों पर बीजेपी हार गई थी। इन दोनों सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने ही जीत दर्ज की थी। अमित शाह ने 20 मई 2024 को हिसार और रोहतक लोकसभा क्षेत्र में रैली की थी। हालांकि अमित शाह ने करनाल में भी कार्यक्रम किया, जहां से बीजेपी को जीत मिली थी।
✍️विधानसभा-2019 में भी मोदी-शाह को नकारा:-

हरियाणा विधानसभा 2019 में भी हरियाणा में बीजेपी विशेषकर पी.एम. नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह का जादू नहीं चला। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलनाबाद में भी पीएम के प्रयास विफल रहे और वहां इनेलो जीती। रेवाड़ी में मोदी ने हुंकार भरी थी, लेकिन वहां कांग्रेस जीती। गोहाना में मोदी ने हुंकार भरी थी, लेकिन वहां भी बीजेपी हार गई, वो जीत कांग्रेस के खाते में गई। हिसार में जिस स्थान (हलका बरवाला) पर पीएम मोदी की रैली हुई, वहां से भाजपा प्रत्याशी हारा था और वहां जेजेपी प्रत्याशी को जीत मिली। हालांकि तब हिसार शहर में जरुर बीजेपी जीती । इसी तरह गृहमंत्री अमित शाह की महम और बहादुरगढ़ रैलियों का जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखा। वहां गृहमंत्री अमित शाह के प्रयास विफल रहे। टोहाना, रतिया और नरवाना में अमित शाह की रैलियां रद्द हो गई थी। इन तीनों सीटों में से भाजपा को सिर्फ रतिया में ही जीत मिली। टोहाना में तो भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष सुभाष बराला तक हार गए थे। हालांकि कैथल, लोहारू और पानीपत ने अमित शाह की इज्जत बचाने में योगदान दिया था।

