✍️3 अक्टूबर को सांय 6 बजे के बाद प्रचार,प्रसार,जनसभा चुनावी सामग्री को सिनेमाटोग्राफी, टेलीविजन या अन्य उपकरणों के माध्यम से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है !

✍️मतदान से एक दिन पहले और मतदान वाले दिन यानी 4 और 5 अक्टूबर को अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करवाने के लिए लेना होगा प्रमाण पत्र !

हिसार टाइम्स – चुनाव व्यय पर्यवेक्षक विजय कुमार मंगला एवं आदित्य कुमार आनंद ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग की हिदायतों अनुसार 3 अक्टूबर को स्थानीय लघु सचिवालय परिसर स्थित जिला सभागार में चुनाव प्रत्याशियों के खर्च का लेखा टीमों द्वारा मिलान किया जाएगा।
चुनाव व्यय पर्यवेक्षक विजय कुमार मंगला एवं आदित्य कुमार आनंद ने बताया कि इससे पूर्व दो बार प्रत्याशियों के चुनाव खर्च का मिलान किया जा चुका है। इसी प्रकार तीसरी बार 3 अक्तूबर को सुबह 10 बजे से सायं 5 बजे तक लेखा टीमों द्वारा चुनाव प्रत्याशियों के खर्च का मिलान किया जाएगा। आयोग की हिदायतों अनुसार चुनाव प्रक्रिया के दौरान तीन बार चुनाव प्रत्याशियों के खर्च के ब्योरे के रजिस्टरों का मिलान करना अनिवार्य है

उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा प्रचार-प्रसार करने पर 3 अक्टूबर को सायं 6 बजे से प्रतिबंध रहेगा। 6 बजे के बाद से राजनीतिक दल या उम्मीदवार किसी भी प्रकार की बैठक या जनसभाएं आयोजित नहीं कर सकेंगे।लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत मतदान की समाप्ति के लिए नियत किए गए समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटों की समयावधि के दौरान किसी भी तरह का प्रचार-प्रसार बंद हो जाता है। इस समयावधि में कोई भी उम्मीदवार न तो किसी तरह की जनसभा आयोजित कर सकता है और न ही उसमें शामिल हो सकता है। इस दौरान किसी भी तरह की चुनावी सामग्री को सिनेमाटोग्राफी, टेलीविजन या अन्य उपकरणों के माध्यम से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है।

इसके अलावा, किसी मतदान क्षेत्र में इस प्रतिबंधित अवधि के दौरान आमजन को आकर्षित करने की दृष्टि से म्यूजिक कॉन्सर्ट या थियेटर प्रोग्राम या अन्य मनोरंजक कार्यक्रम के माध्यम से किसी प्रकार का चुनावी प्रचार भी नहीं किया जा सकता।जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा पोलिंग बूथ के 200 मीटर की परिधि में कोई भी उम्मीदवार या राजनीतिक पार्टी अपना प्रचार नहीं कर सकती है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा धारा 126 उपधारा (1) की उल्लंघना की जाती है तो उस व्यक्ति को 2 साल तक की सजा या जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों ही हो सकती है।
जिला निर्वाचन अधिकारी श्री प्रदीप दहिया ने बताया कि जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 126 (1) (बी) के तहत किसी भी मतदान क्षेत्र में मतदान के समापन के लिए निर्धारित समय के साथ समाप्त होने वाली 48 घंटे (मौन अवधि) की अवधि के दौरान टेलीविजन या इसी तरह के उपकरणों के माध्यम से किसी भी चुनाव संबंधी सामग्री को प्रदर्शित करने पर रोक रहेगी।

चुनावी सामग्री को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने के लिए अभिप्रेत या परिकलित किसी भी मामले के रूप में परिभाषित किया गया है, जो मतदान के समापन के लिए निर्धारित समय के साथ समाप्त होने वाली 48 घंटे की अवधि के दौरान होता है। हालांकि इस समय में प्रिंट मीडिया में जिला या राज्य स्तर की जैसा कि मामला हो, एमसीएमसी कमेटी से पूर्व प्रमाणित विज्ञापन छापे जा सकते है। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 126 ए, के तहत मतदान शुरू होने के लिए निर्धारित समय से लेकर मतदान समाप्त होने तक की अवधि के दौरान प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से एग्जिट पोल आयोजित करने और उनके परिणामों के प्रसार पर रोक रहेगी

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदान से एक दिन पहले और मतदान के दिन यानी 4 व 5 अक्टूबर को प्रिंट मीडिया में विज्ञापन प्रकाशित करवाने से पहले उम्मीदवार या राजनीतिक दल को एमसीएमसी से प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है। उम्मीदवार जिला स्तर पर गठित मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी से विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि से 48 घंटे पहले आवेदन कर प्रमाण पत्र ले सकता है।
यह जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी श्री प्रदीप दहिया ने बताया कि मतदान से पहले और मतदान के दिन समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाला प्रत्येक विज्ञापन संबंधित उम्मीदवार या पार्टी को एमसीएमसी से अनुमति लेना अनिवार्य है।

ऐसा न करने पर संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यदि किसी विज्ञापन के प्रसारण पर कमेटी को आपत्ति है तो वह आवेदन को निरस्त कर सकती है या फिर विज्ञापन को दुरुस्त करने के लिए संबंधित उम्मीदवार को लिख सकती है। इसके लिए संबंधित पक्ष को 24 घंटे का समय दिया जाएगा और उस विज्ञापन को दुरुस्त करके दोबारा आवेदन कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।