राममंदिर वाली अयोध्या में भाजपा की हार की गूंज देश के साथ ही पूरी दुनिया में है।

भाजपा को सत्ता की बुलंदी तक पहुंचाने वाला यूपी एक बार फिर से ‘गेमचेंजर’ साबित हुआ है ।

रामभक्त लोकसभा चुनाव में आए नतीजे से अवाक हैं

500 सालों के संघर्ष के बाद राम मंदिर बनकर तैयार हुआ. चार महीने पहले रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई . बावजूद इसके बीजेपी अयोध्या में धराशाई हो गई.  

लोकसभा चुनाव के परिणाम बता रहे हैं कि भाजपा को लगातार दो बार सत्ता की बुलंदी तक पहुंचाने वाला यूपी एक बार फिर से ‘गेमचेंजर’ साबित हुआ है। 2024 के चुनाव में भाजपा को सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश में लगा है। सपा-कांग्रेस के गठबंधन ने भाजपा और उसके सहयोगी दलों के विजय रथ को यहां की कुल 80 सीटों में आधे से भी कम पर रोक दिया। क्लीन स्वीप यानि सभी 80 सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई। इसके चलते ही भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी.

सवाल ? 2014 और 2019 में पीएम मोदी को सत्ता तक पहुंचाने वाले यूपी में बीजेपी इस बार कैसे हार गई।

यूपी के लोकसभा चुनाव में हार का प्रमुख कारण पूर्व सांसदों की निष्क्रियता रही। जनता में नाराजगी थी। सांसद 2019 में चुनाव जीतने के बाद से पांच साल तक घर बैठने और सिर्फ मोदी-योगी के सहारे जीतने के सपने देखते रहे।

दरअसल, जिन सांसदों के खिलाफ माहौल होने के आधार पर संगठन की ओर से टिकट बदलने की रिपोर्ट हाईकमान को भेजी गई थी, उनमें अधिकांश सांसदों के बारे में यही कहा जाता रहा है कि चुनाव जीतने के बाद पांच साल तक यह जनता के बीच से गायब रहे। क्षेत्र से इनका जुड़ाव नहीं रहा। अपने पूरे कार्यकाल में जनता के बीच काम न करके ऐसे तमाम सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भरोसे बैठे रहे। इसी कारण तमाम सांसदों को जनता ने नकार दिया है।

राममंदिर वाली अयोध्या में भाजपा की हार की गूंज देश के साथ ही पूरी दुनिया में है। रामभक्त लोकसभा चुनाव में आए नतीजे से अवाक हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि ऐसा भी हो सकता है। ऐसे में वे रामनगरी में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और मित्रों को फोन पर उलाहना दे रहे हैं। चुनाव परिणाम आने के तीन दिन बाद भी यह दौर जारी है। सोशल मीडिया पर तो खैर अयोध्यावासियों पर तंज कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

चार जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही अयोध्यावासी कशमकश में हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले उनके रिश्तेदार, मित्र और अन्य संपर्की रोज फोन करके अलग-अलग तरह के सवाल पूछ रहे हैं। कि आखिर ऐसा हो कैसे गया? वह भी जब 500 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद भाजपा के ही राज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई हो।

सदर बाजार निवासी अजय साहू बताते हैं कि अयोध्या में भाजपा की हार के बाद से ही उनके दोस्तों के फोन आने शुरू हो गए। सभी ने जमकर कोसा और सब यही कहते रहे कि कैसे लोग हो जो राम को लाने वालों के भी नहीं हुए। वाराणसी के रहने वाले उनके मित्र संदीप ने कहा कि अयोध्यावासी उनके भी नहीं हुए, जिनके प्रयासों से इतना कुछ मिला। गुस्साए लखनऊ के मनीष अरोड़ा ने कहा कि इस नतीजे से पूरे देश के रामभक्त शर्मिंदा हैं।